अभिनव सोच

8:36 PM

कार्ल मार्क्स ने कहा था कि धर्म अफीम है !
पर यहाँ भारत में तो जातिवाद अफीम है.
थोड़ी सी यह अफीम चखा दो,
अच्छे अच्छे बुद्धिजीवी(?) ‘झेरे’ लेने लगते हैं !
मैं जब उनको लहराता देखता हूँ तो, खूब हंसता हूँ.

यह तो हुई समाज शास्त्र की बात. अब जानिये, जातिवाद का मनोविज्ञान------

असल में ये जातिवादी लोग बड़े असुरक्षित मानसिकता वाले होते हैं. जातिवाद की अफीम इनको ही ज्यादा चढ़ती है. इनको अपनी जाति से कोई विशेष प्रेम या लगाव नहीं होता, ये तो अपनी जाति के लोगों को बरगलाकर खुद का frustration निकालते हैं. दूसरी जाति को निम्न बताना, उसके लिए जहर उगलना, यह इनकी अपनी आतंरिक कमजोरी के लक्षण हैं. खंडित व्यक्तित्व के लक्षण हैं. disintegrated personality के. यही नहीं, ये लोग अपने परिवार में, रिश्तेदारी में, मोहल्ले में, गाँव में या जाति के भीतर भी ऐसा ही व्यवहार करते हैं. बांटने वाला. बड़े unfit किस्म के लोग होते हैं. नकारात्मक बुद्धि के. लेकिन अपनी जाति के कमजोर बच्चों को पढ़ाने का काम इनको सौंपो, भाग जायेंगे ! अपनी जाति के गरीब की सहायता  का इनको कहो, नहीं दिखेंगे. अपनी जाति के किसी मरीज के पास अस्पताल में बैठने को कहो, नहीं बैठेंगे. जाति इनके लिए एक tool है. इतना ही है इनका वाद. 

यह हुआ मनोविज्ञान. अब इसकी यानि जातिवाद की राजनीति..............

कई लोगों को लगता है कि अन्य जातियों के लिए घृणा के गीत गाने से उनकी अपनी जाति में लोकप्रियता बढ़ेगी. जबकि ऐसा होता नहीं है. जातिवादी लोग अक्सर वोट के खेल में भी पिछड़ते हैं. छोटा मेच जीत भी लेते होंगे पर शिखर पर नहीं पहुँचते हैं और न ही इनकी पारी लंबी होती है. 

यह हुआ राजनीति शास्त्र. अब दर्शन शास्त्र-------

जाति अपने आप में बुरी नहीं है. कोई न कोई सामाजिक वर्ग तो होगा. मानव सामाजिक प्राणी है. आप अपनी जाति की सामाजिक -सांस्कृतिक परम्पराओं को निभाईये, उनको आगे बढ़ाईये, अपनी जाति के गरीब-वंचित लोगों को साथ लाने के जतन करिए. यह आवश्यक है, सामाजिक दायित्व है. पर दूसरी जातियों को नीचा दिखाने और उनके प्रति घृणा फैलाने का कारोबार जातिवाद है. उससे बचिए.

वेदों का मूल भाव लाइए.

वन्दे मातरम् करिए.
जातियों को पुनः सहकारी, complementary units बनाईये.
समाज सुन्दर होगा. विभिन्नता सुन्दरता को बढ़ाती है.
पर बांटने की प्रवृति समाज को कुरूप बनाती है.

लेखक
डा. अशोक चौधरी
अभिनव राजस्थान अभियान

You Might Also Like

0 comments